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अगर किसी काम को सच्ची मेहनत और लगन के साथ किया जाए तो सफलता जरुर मिलती है। सच्ची मेहनत और लगन कभी बेकार नहीं जाती। जिनके दिलों में कुछ कर दिखाने का जज्बा होता है वो विपरित परिस्थिति को भी वो अपने अनुकुल कर लेते हैं। इस बात को सच कर दिखाया है युवा बिज़नेसमैन नवीन तिवारी ने। नवीन तिवारी ने अपने हुनर और प्रतिभा के दम पर इनमोबी (Inmobi) की स्थापना की है। Inmobi की स्थापना करना नवीन तिवारी के लिए इतना आसान नहीं था। इसके लिए उन्हें काफी संघर्ष करना पड़ा।

साल 1977 में नवीन तिवारी का जन्म एक बहुत ही साधारण परिवार में हुआ था। उनके परिवार में शिक्षा और सरकारी नौकरी को काफी महत्व दिया जाता था। उनके पिताजी आईआईटी कानपुर के डीन और इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग के प्रोफेसर थे| नवीन तिवारी ने भी आईआईटी कानपुर से मैक्निकल इंजीनियरिंग में स्नातक पूर्ण करने के बाद हार्वर्ड बिजनेस स्कूल से अपनी MBA की शिक्षा पूर्ण की है |

नवीन तिवारी ने अपनी स्नातक की डिग्री पूर्ण करने के बाद मैकिन्से एंड कंपनी में नौकरी करने से अपने कैरियर की शुरुआत की थी| इस कंपनी में उन्होंने 3 वर्ष तक काम किया। अपनी नौकरी के दौरान उन्होंने कई टेक कंपनियों के टॉप मैनेजमेंट के साथ काम किया और फिर वेंचर कैपिटल फर्म, चार्ल्स रिवर वेंचर्स में भी अपनी सेवाएँ दी। वर्ष 2005 में हार्वर्ड बिजनेस स्कूल से अपनी MBA की शिक्षा के दौरान उन्होंने एक गैर लाभकारी संगठन “इंडिया स्कूल हाउस” फंड की स्थापना की, जो कि ग्रामीण भारत में स्कूलों के लिए फंड जुटाता है।

लेकिन इसके बाद भी वो कुछ अलग करना चाहते थे। नवीन तिवारी ने हार्वर्ड जाने के बाद देखा कि एंटरप्रिन्योर्स और बिजनेस लीडर्स भी उनकी तरह ही एक आम इंसान होते है| बस इसी बात ने उनको एंटरप्रिन्योरशिप (Entrepreneurship) के प्रति बहुत प्रेरित किया था| उस समय उनको अपने साथी स्टूडेंट्स के लिए भारत का एक ट्रिप आयोजित करने का मौका मिला। जिससे उनके बाकी साथी भी भारत से जुड़ी आर्थिक संभावनाओं, संस्कृति और आम लोगों के बारे में जान सकें। अपनी इस ट्रिप के समय ही उन्हें उन्हें मोबाइल डील्स और मोबाइल सर्च से जुड़ा आइडिया आया।

अपने इस आइडिया को पूरा करने के लिए नवीन तिवारी ने वर्ष 2007 में मुंबई के एक बेडरूम के छोटे से फ्लैट और 10 कर्मचारियों के साथ एमखोज की स्थापना की। यह एसएमएस आधारित सर्च सर्विस पर फोकस करती थी। जिसके लिए उन्हें एंजेल फंडिंग द्वारा 5 लाख डॉलर का फंड दिया गया था| इसके बाद वर्ष 2009 में उन्होंने इस कंपनी का नाम Inmobi  रखा और उसे मोबाइल-डिवाइस एडवरटाइजिंग फर्म में बदल दिया |

इनमोबी के लॉन्च के बाद भी कई चुनौतियां उनके सामने आईं, अब की तुलना में पहले देश के निवेशकों को आकर्षित कर पाना बेहद मुश्किल था। भारत में भी अच्छे सॉफ्टवेयर बनाए जा सकते हैं विदेशी निवेशकों को यह समझाना सबसे बड़ी चुनौती थी। लेकिन नवीन अपनी मेहनत और अनुभव के दम पर सभी चुनौतियों का डटकर सामना करते रहे और आगे बढ़ते रहे।

इनमोबी की पहचान आज पूरे विश्व में है। गूगल के एडमॉब नेटवर्क के बाद दुनिया के दूसरे सबसे बड़े मोबाइल एडवरटाइजिंग नेटवर्क के रूप में इनमोबी को जाना जाता है। आज उनकी कंपनी 165 से भी ज्यादा देशों के 1200 मिलियन से भी ज्यादा स्मार्टफोन यूजर्स को अपने कारोबार से जुड़ी सेवाएँ पहुंचा रही है। नवीन तिवारी ने अपनी मेहनत और लगन के दम पर अपनी सफलता की कहानी (Success Story) लिखी है। आज उनकी गिनती दुनिया के टॉप बिज़नेसमैन में होती है। उनकी कहानी सभी के लिए प्रेरणास्त्रोत (Inspiration) है।

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